50 से अधिक यंत्रों की खरीद—डॉ. प्रेम कुमार ने किया समापन
गया, 11 दिसंबर 2025, ओम शर्मा: मानपुर प्रखंड परिसर में आयोजित दो दिवसीय कृषि यांत्रिकरण मेले का भव्य समापन बिहार विधानसभा अध्यक्ष डॉ. प्रेम कुमार ने किया, जिसमें 91 प्रकार के आधुनिक कृषि यंत्रों की प्रदर्शनी लगाई गई और किसानों को कटाई, बुआई, जुताई, मड़ाई सहित पराली प्रबंधन से जुड़े उपकरणों के साथ खुरपी, कुदाल, हँसिया जैसे आवश्यक कृषि यंत्र भी अनुदानित दर पर उपलब्ध कराए गए। डॉ. प्रेम कुमार ने बताया कि जिले के 1694 किसानों को लॉटरी के माध्यम से स्वीकृति पत्र दिया गया है, जबकि दो कृषि विज्ञान केंद्रों के माध्यम से कृषि तकनीक का प्रचार-प्रसार लगातार हो रहा है। उन्होंने कहा कि किसानों को मात्र 4% ब्याज दर पर कृषि ऋण उपलब्ध कराया जा रहा है और PM-KISAN के तहत 3,09,497 किसानों को तीन किस्तों में 185.69 करोड़ रुपये की आर्थिक सहायता दी जा चुकी है। समापन समारोह में आमस, खिजरसराय, डोभी, शेरघाटी और मोहनपुर के प्रखंड कृषि पदाधिकारियों को उत्कृष्ट कार्य के लिए प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया, वहीं मेले में श्रेष्ठ प्रदर्शन के लिए मे. कुशवाहा एग्रो, मे. न्यू मगध बीज भंडार, मे. जय गुरुदेव और मे. पंजाब मशीनरी स्टोर को पुरस्कृत किया गया। इस दौरान जिला कृषि पदाधिकारी संजीव कुमार सहित सभी सहायक निदेशक, अनुमंडल कृषि पदाधिकारी और प्रखंड कृषि पदाधिकारी उपस्थित रहे। मेले में 50 से अधिक कृषि यंत्रों की खरीद की गई, जिन पर 10 लाख रुपये से अधिक का अनुदान दिया गया।
पंचायत स्तर पर उर्वरक निगरानी कड़ी: किसान सलाहकार व कृषि समन्वयक होंगे स्थानीय विक्रेताओं से टैग, लगातार होगी जांच
गया, 12 दिसंबर 2025 — जिले में किसानों को निर्धारित मूल्य पर समय से उर्वरक उपलब्ध कराने के उद्देश्य से जिला प्रशासन ने पंचायत स्तर पर सख्त व्यवस्था लागू की है, जिसके तहत किसान सलाहकार और कृषि समन्वयकों को अब अपने-अपने प्रखंड/पंचायत क्षेत्रों के स्थानीय उर्वरक विक्रेताओं से टैग किया जाएगा, ताकि वे लगातार निगरानी करते हुए यह सुनिश्चित कर सकें कि इच्छुक किसानों को बिना किसी परेशानी के उर्वरक मिलती रहे। प्रशासन ने स्पष्ट निर्देश दिया है कि टैग किए गए अधिकारी दुकानों के स्टॉक, मूल्य सूची और दैनिक बिक्री की नियमित जांच करेंगे और किसी भी अनियमितता की स्थिति में तुरंत रिपोर्ट करेंगे, जिससे जिले में उर्वरक वितरण पारदर्शी और नियंत्रित रहे तथा फसल के महत्वपूर्ण समय में किसानों को किसी प्रकार की कमी का सामना न करना पड़े।
























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