पटना/गया, 21 मार्च 2026: मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की ‘समृद्धि यात्रा’ ने बिहार के विकास का एक नया रोडमैप खींच दिया है। 2030 तक ‘सात निश्चय-3’ के तहत 1 करोड़ नौकरियां, महिलाओं को आर्थिक सहायता और बुनियादी ढांचे के विस्तार के लिए सरकार की तिजोरी खुल चुकी है। केंद्र से मिल रहे भारी पैकेज और राज्य की अपनी योजनाओं को मिलाकर बिहार पर करोड़ों रुपये की अमृत वर्षा होने वाली है।
लेकिन, इस चमकते भविष्य के बीच एक बड़ा यक्ष प्रश्न खड़ा है— क्या विकास की यह विशाल राशि बिना किसी ‘कमीशन’ के धरातल पर उतरेगी?
टेंडर माफिया और ‘पीसी’ (Percentage Culture) पर नकेल जरूरी
गया के जन संवाद में मुख्यमंत्री ने पिछली सरकारों के ‘जंगलराज’ और ‘अशांति’ का जिक्र किया, लेकिन आज की सबसे बड़ी चुनौती ‘सफेदपोश भ्रष्टाचार’ है। जनता के मन में यह डर बैठ गया है कि:
क्या टेंडर दिलाने के नाम पर बिचौलिए और रसूखदार नेता अपनी जेबें तो नहीं भरेंगे?
क्या ‘सात निश्चय-3’ के तहत मिलने वाली राशि का एक बड़ा हिस्सा भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ जाएगा?
क्या अधिकारी और ठेकेदारों का पुराना ‘गठबंधन’ फिर से सक्रिय होगा?
जनता की उम्मीद: ‘एक रुपया भी बेकार न जाए’
सरकार ने वादा किया है कि गरीब परिवारों को 2 लाख रुपये और महिलाओं को रोजगार के लिए आर्थिक मदद दी जाएगी। आम आदमी की बस एक ही मांग है— “हक का पैसा, पूरा पैसा।” यदि इन योजनाओं के टेंडर में ‘कमीशनखोरी’ हावी रही, तो निर्माण कार्य की गुणवत्ता गिरेगी और गरीब का हक मारा जाएगा।
नेताओं और मंत्रियों के लिए चेतावनी
मंच पर मौजूद केंद्रीय मंत्री जीतनराम मांझी, उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और अन्य दिग्गजों की मौजूदगी में मुख्यमंत्री ने विकास का खाका तो खींचा, लेकिन अब जिम्मेदारी इन मंत्रियों की है कि वे अपने-अपने विभागों में ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति लागू करें।
“वक्त आ गया है कि कागजों पर विकास दिखाने के बजाय, जमीन पर ईमानदारी दिखाई जाए। अगर टेंडर प्रक्रिया में पारदर्शिता नहीं आई, तो समृद्धि यात्रा केवल चुनावी नारा बनकर रह जाएगी।”
सुझाव: कैसे रुकेगा भ्रष्टाचार?
डिजिटल निगरानी: सभी टेंडर और भुगतान प्रक्रिया को पूरी तरह सार्वजनिक और डिजिटल किया जाए।
डायरेक्ट बेनिफिट: महिलाओं और युवाओं को दी जाने वाली राशि सीधे उनके खाते में जाए, ताकि बीच का कोई ‘कमीशनखोर’ सक्रिय न हो सके।
कठोर दण्ड: भ्रष्टाचार में संलिप्त अधिकारियों और बिचौलियों पर त्वरित कार्रवाई के लिए ‘स्पेशल विजिलेंस सेल’ को और सक्रिय किया जाए।
निष्कर्ष:
बिहार अब विकास की उस दहलीज पर है जहाँ से वह ‘अग्रणी राज्यों’ में शामिल हो सकता है। मुख्यमंत्री की नीयत साफ है, लेकिन तंत्र को साफ करना मंत्रियों और जनप्रतिनिधियों का काम है। जनता जाग रही है, और वह इस बार ‘विकास के नाम पर लूट’ बर्दाश्त करने के मूड में नहीं है।
























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