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खुलासा: गया में बिजली विभाग का ‘वसूली गैंग’ बेनकाब! DM के चक्रव्यूह में फंसे घूसखोर अफसर, जूनियर इंजीनियर सस्पेंड, ‘फर्जी’ रेड कर ऐंठे थे ₹70,000!

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Om Sharma, गया (बिहार) | 17 जुलाई 2026: बिहार के प्रशासनिक गलियारे से इस वक्त की सबसे सनसनीखेज और हिला देने वाली खबर सामने आ रही है। गया जिला प्रशासन ने भ्रष्टाचार के खिलाफ एक ऐसा ‘ब्रह्मास्त्र’ चलाया है, जिसने सरकारी महकमों में बैठे सफेदपोश लुटेरों और घूसखोरों की रीढ़ की हड्डी तोड़ कर रख दी है।गया के जिला पदाधिकारी (DM) श्री शशांक शुभंकर की ‘जीरो टॉलरेंस’ वाली हंटर नीति ने इमामगंज प्रखंड के विद्युत विभाग में चल रहे एक बड़े ‘अवैध वसूली रैकेट’ का भंडाफोड़ कर दिया है। एक बेकसूर व्यापारी को जाल में फंसाकर, डरा-धमकाकर हजारों रुपये चूसने वाले कनीय अभियंता (JE) सचिन कुमार को तत्काल प्रभाव से **सस्पेंड (निलंबित)** कर दिया गया है।इतना ही नहीं, इस ‘वसूली सिंडिकेट’ में शामिल असिस्टेंट इंजीनियर से लेकर लाइनमैन तक, पूरे के पूरे गैंग पर विभागीय गाज गिर गई है!

**क्राइम थ्रिलर जैसी थी साजिश: ‘टोका’ का फर्जी खौफ दिखाकर बिछाया था जाल**यह पूरी कहानी किसी फिल्मी सस्पेंस से कम नहीं है। इमामगंज प्रखंड के मंझौली ग्राम के रहने वाले एक सीधे-साधे आइस फैक्ट्री (बर्फ कारखाने) के मालिक, **श्री उमेश साव** को इस भ्रष्ट गैंग ने अपना शिकार बनाया। *

**साजिश का पहला कदम:** विद्युत विभाग की एक टीम उमेश साव की फैक्ट्री पर धावा बोलती है। * **फर्जी आरोप का खौफ:** टीम ने बिना किसी ठोस सबूत के व्यापारी पर आरोप मढ़ दिया कि उन्होंने मशीन चलाने के लिए ‘टोका’ (अवैध बिजली कनेक्शन) फंसाया हुआ था। व्यापारी चिल्लाता रहा, अपनी बेगुनाही की दुहाई देता रहा, लेकिन विभाग के ‘शिकारी’ शिकार छोड़ने को तैयार नहीं थे। *

**डील का खेल:** मामले को रफा-दफा करने, केस न बनाने और जेल न भेजने के नाम पर कनीय अभियंता (JE) सचिन कुमार ने भारी-भरकम ‘अवैध वसूली’ का घिनौना खेल शुरू किया।

**डिजिटल सबूत ने खोल दी पोल: UPI ट्रांसफर से लेकर कैश तक की लूट!**डरे हुए व्यापारी से इस ‘सरकारी गैंग’ ने कुल **70,000 रुपये** की जबरन वसूली की। लेकिन डिजिटल इंडिया के इस दौर में भ्रष्टाचारियों ने जो सबूत पीछे छोड़े, वही उनकी बर्बादी का सबब बन गए।

*₹50,000 कैश:** पीड़ित व्यापारी से पचास हजार रुपये नकद ऐंठे गए। * **₹20,000 का ‘डिजिटल पाप’:** चालाकी दिखाते हुए जूनियर इंजीनियर सचिन कुमार ने खुद पैसे न लेकर, अपने विभाग के **लेखापाल (Accountant) रंजीत कुमार के बैंक खाते में UPI के जरिए 20,000 रुपये** ट्रांसफर करवाए। यही डिजिटल ट्रांजैक्शन इस गैंग के ताबूत की आखिरी कील साबित हुआ।### **DM का ‘स्पेशल ऑपरेशन’ और SDM की खोजी जांच**जब पीड़ित उमेश साव ने हिम्मत जुटाकर सीधे गया के जिला पदाधिकारी श्री शशांक शुभंकर के दरबार में गुहार लगाई, तो DM ने मामले की गंभीरता को भांपते हुए **जून 2026 में अनुमंडल पदाधिकारी (SDM), शेरघाटी** को इस पूरे प्रकरण की ‘सर्जिकल स्ट्राइक’ जांच सौंप दी।SDM शेरघाटी ने जब इस मामले की परतें खोलीं, तो होश उड़ने वाले खुलासे हुए: 1. विद्युत विभाग के पास इस बात का **कोई ठोस सबूत ही नहीं था** कि आइस फैक्ट्री में कोई ‘टोका’ फंसाया गया था। यानी पूरी रेड ही फर्जी और डराने के लिए की गई थी। 2. लेखापाल के खाते में आए 20,000 रुपये के डिजिटल ट्रांजैक्शन ने घूसखोरी को शत-प्रतिशत प्रमाणित कर दिया।### **बर्बादी का आदेश: कौन-कौन आया इस महा-कार्रवाई की जद में?**SDM की रिपोर्ट मिलते ही DM शशांक शुभंकर का गुस्सा फूट पड़ा। उन्होंने अधीक्षण अभियंता को पत्र लिखकर पूरे ‘सिंडिकेट’ को नेस्तनाबूद करने का आदेश दे दिया:| पद (Designation) | नाम (Name) | कार्रवाई की स्थिति (Action Status) ||—|—|—|| **कनीय अभियंता (JE)** | श्री सचिन कुमार | **तत्काल निलंबित (Suspended)**, मुख्यालय बदला गया। || **सहायक अभियंता (AE)** | श्री राजीव झा | गंभीर विभागीय अनुशासनिक कार्रवाई शुरू। || **लेखापाल (Accountant)** | श्री रंजीत कुमार | विभागीय कार्रवाई और जांच के घेरे में। || **मानव बल (Staff)** | श्री संजय पासवान | अनुशासनिक कार्रवाई के निर्देश। || **सुपरवाइजर** | श्री विक्रम सिंह | कड़ी विभागीय कार्रवाई की जद में। || **लाइनमैन** | (संबंधित कर्मी) | **भूमिका संदिग्ध, FIR (प्राथमिकी) दर्ज!** |### **भागलपुर कालापानी: सस्पेंशन के बाद JE को भेजा गया दूर!**बिहार राज्य विद्युत विभाग, पटना ने जिला पदाधिकारी की अनुशंसा पर बिना एक पल गंवाए JE सचिन कुमार को **सस्पेंड** करने का कड़ा फरमान जारी कर दिया है। निलंबन की अवधि के दौरान उन्हें उनके क्षेत्र से हटाकर **विद्युत आंचल, भागलपुर** अटैच कर दिया गया है—यानी सीधे शब्दों में कहें तो भ्रष्टाचार की सजा के तौर पर उनका मुख्यालय कोसों दूर बदल दिया गया है। वहीं संदिग्ध लाइनमैन पर केस (FIR) दर्ज होने के बाद अब जेल जाने की नौबत आ गई है।### *

*DM की सीधी चेतावनी: “सुधर जाओ, वरना सलाखें तैयार हैं!”**इस ऐतिहासिक कार्रवाई के बाद जिला पदाधिकारी श्री शशांक शुभंकर ने पूरे जिले के भ्रष्ट अधिकारियों को दो टूक शब्दों में अंतिम चेतावनी दे दी है:> “सरकारी कार्यों में भ्रष्टाचार, जनता से अवैध वसूली और अपने पद का दुरुपयोग करने वालों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा। चाहे अधिकारी कितना भी बड़ा क्यों न हो, अगर वो दोषी पाया गया, तो उसके खिलाफ इतनी कठोर और नियमानुसार कार्रवाई होगी कि वो मिसाल बनेगी। आम जनता का प्रशासन पर भरोसा हर हाल में कायम रहेगा।”

**सबक:** यह खबर उन तमाम भ्रष्ट मुलाजिमों के लिए एक खौफनाक चेतावनी है जो जनता को अपनी जागीर समझते हैं। याद रखिए, अगर आप घूस ले रहे हैं, तो कानून का ‘डिजिटल और प्रशासनिक’ शिकंजा आपकी नौकरी भी खाएगा और आपको समाज में बदनाम करके सलाखों के पीछे भी भेजेगा!

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