“1250 हेक्टेयर में प्राकृतिक और जैविक खेती, गया में कृषि क्रांति की नई शुरुआत”
“पूर्व सांसद सुषील सिंह ने किसानों से की अपील— खेत बचाइए, प्राकृतिक खेती अपनाइए
ओम शर्मा।आमस/गयाजी:
🌱🚜 गया जिले में प्राकृतिक और जैविक खेती को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। शुक्रवार को कृषि विज्ञान केंद्र, आमस में ‘‘खेत चाओ अभियान’’ के तहत जिला स्तरीय प्राकृतिक खेती कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्घाटन औरंगाबाद के पूर्व सांसद श्री सुषील सिंह ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया। इस अवसर पर कृषि विभाग के अधिकारी, कृषि वैज्ञानिक, जनप्रतिनिधि, पंचायत प्रतिनिधि तथा बड़ी संख्या में किसान उपस्थित रहे।कार्यक्रम को संबोधित करते हुए पूर्व सांसद श्री सुषील सिंह ने कहा कि रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों पर बढ़ती निर्भरता खेती और पर्यावरण दोनों के लिए चिंता का विषय है।

उन्होंने किसानों से अपील की कि वे कम से कम अपनी खेती के 20 से 25 प्रतिशत हिस्से में प्राकृतिक खेती अपनाएं ताकि परिवार को शुद्ध एवं सुरक्षित खाद्यान्न उपलब्ध हो सके। उन्होंने कहा कि पंजाब और हरियाणा जैसे राज्यों में अत्यधिक रासायनिक उपयोग के कारण मिट्टी की गुणवत्ता प्रभावित हुई है और बिहार के किसानों को इस स्थिति से सबक लेने की जरूरत है।उन्होंने कहा कि प्राकृतिक खेती केवल खेती की तकनीक नहीं बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए स्वस्थ मिट्टी, स्वच्छ जल और सुरक्षित पर्यावरण सुनिश्चित करने का माध्यम है। रासायनिक उर्वरकों के अत्यधिक प्रयोग से मिट्टी की उर्वरा शक्ति लगातार कम हो रही है, जबकि प्राकृतिक खेती मिट्टी के जैविक गुणों को बनाए रखने में मदद करती है।जिला कृषि विभाग ने जानकारी दी कि गया जिले में वर्तमान में जैविक एवं प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए तीन प्रमुख योजनाएं संचालित की जा रही हैं

— जैविक खेती प्रोत्साहन कार्यक्रम, राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन तथा परंपरागत कृषि विकास योजना। इन योजनाओं के तहत जिले के विभिन्न क्षेत्रों में लगभग 1250 हेक्टेयर भूमि पर जैविक एवं प्राकृतिक खेती की जा रही है। जिले के 40 क्लस्टरों में 2410 किसान इस अभियान से जुड़कर खेती के नए मॉडल को अपनाने में जुटे हैं।परंपरागत कृषि विकास योजना के तहत जिले के बांकेबाजार, बोधगया, टनकुप्पा, फतेहपुर और टिकारी प्रखंडों में 25 क्लस्टरों का चयन किया गया है, जहां 535 किसान लगभग 500 हेक्टेयर भूमि पर जैविक खेती कर रहे हैं। किसानों को प्रशिक्षण, जैविक प्रमाणीकरण, समूह गठन, जैविक उत्पादों की पैकेजिंग और विपणन के लिए सहायता दी जा रही है। कृषि विभाग द्वारा किसानों को नीम तेल, एनपीके लिक्विड कॉन्सोर्टिया, पीएसबी लिक्विड, ट्राइकोडर्मा, वेस्ट डी-कंपोजर सहित कई जैविक कृषि आदान अनुदानित दर पर उपलब्ध कराए गए हैं। इसके अलावा किसानों को स्प्रेयर, पैकेजिंग बैग और क्रेट जैसी सुविधाएं भी उपलब्ध कराई गई हैं ताकि वे अपने उत्पादों को बेहतर तरीके से बाजार तक पहुंचा सकें।राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन के तहत जिले के 15 प्रखंडों में एक-एक क्लस्टर का चयन कर 1875 किसानों को प्रशिक्षित किया गया है। लगभग 750 हेक्टेयर भूमि पर प्राकृतिक खेती को बढ़ावा दिया जा रहा है। किसानों को बीजामृत, जीवामृत, घनजीवामृत, नीमास्त्र, दशपर्णी अर्क, मल्चिंग, बहुफसली खेती तथा पारंपरिक बीजों के उपयोग की तकनीक सिखाई जा रही है।कृषि विभाग ने बताया कि किसानों को प्राकृतिक खेती अपनाने के लिए निष्पादन आधारित प्रोत्साहन राशि भी दी जा रही है।साथ ही उन्हें ड्रम, मिक्सिंग एवं स्टोरेज कंटेनर जैसी आवश्यक सामग्रियां उपलब्ध कराई जा रही हैं।
चयनित क्लस्टरों में जैविक संसाधनों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए जिले में 10 जैव उपादान संसाधन केंद्र (BRC) स्थापित किए गए हैं।कार्यक्रम में जिला कृषि पदाधिकारी, कृषि विज्ञान केंद्र के वरीय वैज्ञानिक, आत्मा परियोजना के अधिकारी, कृषि समन्वयक, किसान सलाहकार, जनप्रतिनिधि एवं बड़ी संख्या में किसान उपस्थित रहे। सभी ने एक स्वर में प्राकृतिक खेती को भविष्य की आवश्यकता बताते हुए इसे जन-जन तक पहुंचाने का संकल्प लिया।यह कार्यशाला न केवल किसानों को नई तकनीक से जोड़ने का प्रयास है, बल्कि खेती को टिकाऊ, पर्यावरण अनुकूल और लाभकारी बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल भी है। आने वाले समय में प्राकृतिक खेती गया जिले की कृषि व्यवस्था में बड़ा बदलाव ला सकती है।
























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