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₹21 हजार करोड़ से ₹1.27 लाख करोड़ तक कृषि बजट की छलांग: बीमा, कर्ज, ड्रोन, AI और नकद सहायता से खेती को बचाने का केंद्र का बड़ा दांव

₹1.27 लाख करोड़ का कृषि बजट: कर्ज, बीमा, ड्रोन और डिजिटल खेती से किसानों को बड़ी राहत
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नई दिल्ली/गया। भारत सरकार ने संसद में कृषि को लेकर ऐसा आंकड़ा और रोडमैप पेश किया है, जिसने न सिर्फ अधिकारियों बल्कि किसानों को भी सोचने पर मजबूर कर दिया है। कृषि राज्य का विषय होने के बावजूद केंद्र सरकार ने कृषि एवं किसान कल्याण विभाग का बजट 2013-14 के ₹21,933.50 करोड़ से बढ़ाकर 2025-26 में रिकॉर्ड ₹1,27,290.16 करोड़ कर दिया है, जिससे साफ संकेत मिलता है कि सरकार अब खेती को केवल आजीविका नहीं बल्कि भविष्य की अर्थव्यवस्था मान रही है। किसान क्रेडिट कार्ड के जरिए किसानों को 7% ब्याज पर कर्ज और समय पर भुगतान करने पर सिर्फ 4% ब्याज में ऋण की सुविधा दी जा रही है, वहीं प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत बुवाई से लेकर कटाई के बाद तक प्राकृतिक आपदा और मौसम की मार से सुरक्षा सुनिश्चित की गई है। पीएम-किसान योजना के जरिए अब तक 21 किस्तों में ₹4.09 लाख करोड़ से अधिक की सीधी मदद किसानों के खातों में पहुंच चुकी है। बागवानी को उद्योग से जोड़ने के लिए मेगा फूड पार्क, प्रसंस्करण इकाइयों और प्रशिक्षण पर जोर है, जबकि कृषि यंत्रीकरण को बढ़ावा देने के लिए कस्टम हायरिंग सेंटर, हाईटेक मशीन हब और किसान ड्रोन जैसी आधुनिक तकनीकों को खेत तक उतारा जा रहा है। केवीके के माध्यम से नई किस्मों, उन्नत तकनीक और गुणवत्तापूर्ण बीजों का सीधा लाभ किसानों तक पहुंचाया जा रहा है। जलवायु परिवर्तन के खतरे को देखते हुए 651 कृषि प्रधान जिलों का वैज्ञानिक आकलन कर 310 जिलों को संवेदनशील घोषित किया गया है और 448 जलवायु-प्रतिरोधी गांवों में सूखा-बाढ़ सहनशील फसलों का प्रदर्शन किया जा रहा है। ‘प्रति बूंद अधिक फसल’ योजना से सूक्ष्म सिंचाई को बढ़ावा देकर पानी, खाद और लागत—तीनों में बचत कर किसानों की आय बढ़ाने का दावा किया गया है। जैविक और प्राकृतिक खेती, फसल अवशेष प्रबंधन, एफपीओ गठन, कृषि स्टार्टअप्स, डिजिटल कृषि, एआई-एमएल, आईओटी और ब्लॉकचेन जैसी तकनीकों के जरिए खेती को स्मार्ट और लाभकारी बनाने की दिशा में सरकार आक्रामक रणनीति पर काम कर रही है। कृषि एवं किसान कल्याण राज्य मंत्री रामनाथ ठाकुर ने राज्यसभा में लिखित जवाब में स्पष्ट किया कि केंद्र की मंशा किसानों की आय, सुरक्षा और स्थिरता—तीनों को एक साथ मजबूत करने की है, अब सवाल यह है कि ज़मीन पर इसका असर कितनी तेजी और ईमानदारी से दिखता है।

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