PRESS MEDIA

“देशभर के पत्रकारों का साझा मंच”

मखाना अब सिर्फ फसल नहीं, राष्ट्रीय ब्रांड बनेगा—₹476 करोड़ की स्कीम के साथ राष्ट्रीय मखाना बोर्ड ने तय किया रोडमैप

राष्ट्रीय मखाना बोर्ड की पहली बैठक में कृषि सचिव डॉ. देवेश चतुर्वेदी की अध्यक्षता में ₹476 करोड़ की मखाना विकास योजना पर चर्चा
Spread the love

नई दिल्ली। भारत के पारंपरिक सुपरफूड मखाना को वैश्विक पहचान दिलाने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए राष्ट्रीय मखाना बोर्ड की पहली ऐतिहासिक बैठक कृषि भवन, नई दिल्ली में संपन्न हुई। बैठक की अध्यक्षता कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के सचिव डॉ. देवेश चतुर्वेदी ने की, जिसमें मखाना क्षेत्र के समग्र, वैज्ञानिक और बाजारोन्मुखी विकास के लिए ठोस रणनीति और कार्ययोजना को अंतिम रूप दिया गया। इस बैठक के साथ ही केंद्र सरकार द्वारा स्वीकृत ₹476 करोड़ की केंद्रीय क्षेत्र की स्कीम के क्रियान्वयन की औपचारिक शुरुआत हो गई।

बैठक में राज्यों और अनुसंधान संस्थानों द्वारा प्रस्तुत वार्षिक कार्य योजनाओं की गहन समीक्षा की गई और अनुसंधान, गुणवत्तापूर्ण बीज उत्पादन, आधुनिक खेती पद्धतियों, प्रसंस्करण, मूल्य संवर्धन, ब्रांडिंग और निर्यात को प्राथमिकता देते हुए बजट आवंटन किया गया। बोर्ड ने स्पष्ट किया कि अब मखाना उत्पादन केवल पारंपरिक क्षेत्रों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि गैर-पारंपरिक राज्यों में भी प्रशिक्षण और तकनीकी सहयोग के जरिए इसका विस्तार किया जाएगा।

बीज की उपलब्धता को किसानों की सबसे बड़ी जरूरत मानते हुए यह निर्णय लिया गया कि राज्य कृषि विश्वविद्यालय सबौर और केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय समस्तीपुर (बिहार) इस वर्ष और अगले वर्ष विभिन्न राज्यों की बीज मांग को पूरा करेंगे। इसके साथ ही एनआरसी मखाना, दरभंगा सहित प्रमुख अनुसंधान संस्थान और विश्वविद्यालय, देशभर के प्रशिक्षकों को मखाना मूल्य शृंखला की अत्याधुनिक तकनीकों का प्रशिक्षण देंगे, ताकि खेती से लेकर प्रसंस्करण तक गुणवत्ता में एकरूपता लाई जा सके।

बैठक में इस बात पर विशेष जोर दिया गया कि मखाना की कटाई और कटाई के बाद की प्रक्रियाओं में सुधार किए बिना किसानों की आय बढ़ाना संभव नहीं है। इसी को ध्यान में रखते हुए ग्रेडिंग, सुखाने, पॉपिंग और पैकेजिंग के लिए आधुनिक अवसंरचना विकसित करने पर सहमति बनी। बोर्ड ने यह भी तय किया कि नई कृषि तकनीकों को बढ़ावा देकर उत्पादन लागत घटाई जाएगी और उत्पाद की गुणवत्ता को अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप बनाया जाएगा।

राष्ट्रीय मखाना बोर्ड ने मखाना को मूल्य संवर्धन के जरिए उच्च आय वाला उत्पाद बनाने की दिशा में भी ठोस पहल करने का संकेत दिया है। ब्रांडिंग, मार्केट लिंकेज और निर्यात तैयारी को रणनीतिक रूप से आगे बढ़ाया जाएगा, ताकि भारतीय मखाना वैश्विक बाजार में प्रतिस्पर्धी बन सके। गुणवत्ता नियंत्रण और मानकीकरण को अनिवार्य बनाकर उपभोक्ताओं का भरोसा मजबूत करने पर भी सहमति बनी।

इस संस्थापक बैठक को मखाना क्षेत्र के लिए मील का पत्थर माना जा रहा है, क्योंकि पहली बार पूरे देश में मखाना उत्पादन, प्रसंस्करण और विपणन को एकीकृत दृष्टिकोण से आगे बढ़ाने की ठोस रूपरेखा तैयार की गई है। इसका सीधा लाभ मखाना किसानों, प्रसंस्करण इकाइयों और निर्यातकों को मिलेगा।

पृष्ठभूमि में बड़ी तस्वीर:
केंद्र सरकार ने बजट 2025-26 में की गई घोषणा के अनुरूप राष्ट्रीय मखाना बोर्ड का गठन किया था, जिसका औपचारिक शुभारंभ प्रधानमंत्री द्वारा 15 सितंबर 2025 को बिहार से किया गया। 2025-26 से 2030-31 तक लागू होने वाली ₹476.03 करोड़ की केंद्रीय क्षेत्र की स्कीम के तहत अनुसंधान, नवाचार, गुणवत्तापूर्ण बीज, किसान प्रशिक्षण, बेहतर कटाई तकनीक, मूल्य संवर्धन, ब्रांडिंग, मार्केटिंग और निर्यात को एक साथ मजबूत किया जाएगा।

सरकार का मानना है कि इस समन्वित प्रयास से मखाना क्षेत्र न केवल किसानों की आय बढ़ाएगा, बल्कि भारत को वैश्विक मखाना बाजार में अग्रणी स्थान दिलाने में भी निर्णायक भूमिका निभाएगा।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *